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Tuesday, September 30, 2008

अर्थोपनिषद २ (मनमोहन ने नेहरु को दफनाया)

नेहरु जी ने भारत को कई एतिहासिक समस्याएं दी है। लेकिन स्वदेशी उद्योगों को संरक्षण दे कर देश को आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढानेका काम भी नेहरु जी ने बखुबी किया था। लेकिन बैश्विकरण के लुभावने लफजबाजी से मनमोहन सिहं ने नेहरु जी को दफना दिया है। वेस्टन, ओनिडा, टेक्साला आदि ब्राण्डो से बिक्ने बाले भारतीय टेलिवीजन लुप्त हो चुके है । जगह ले लिया है कोरिया जैसे छोटे से देश की कम्पनीयो सामसुन्ग और एलजी (लक्की गोल्डस्टार) ने। भारत मे करोडो. मोबाइल उपभोक्ता है, लेकिन एक भी कम्पनी स्वदेशी मोबाइल सेट या उपकरण नही बनाती है। जबकी चीन की जेडटीइ ओर हुवावैइ से माल लेकर रिलायन्स ओर टाटा वाले ठप्पा भर लगते है ।

ये कैसा ग्लोवीकरण है, भारतीय धन बिदेशों मे जा रहा है विलासितापुर्ण तकनिकी उत्पादनो के लिए । विना आयात शुल्क संरक्षण के कोई भी स्वदेशी कम्पनी मुकाबला नही कर सकती धुरंधर विदेशी कम्पनीयो का। लेकिन मनमोहन की नजर मे तो स्वदेशी विदेशी एक हीं है ।