सोनिया के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार और उसकी गुलाम मिडीया हिन्दु संगठनो पर आतंकवादी का बिल्ला चिपकाना के लिए हर संभव प्रयत्न कर रही है। लेकिन आईए वास्तविकता को समझने का प्रयास करें।
भारत में पिछले दश बर्षो में नक्सलियो ने हजारो बम बिष्फोट किए हैं, माओवादीयों ने हजारों को मौत के घाट उतारा हैं । वैसे ही जेहादियों ने भी उतनी ही तादाद में बिष्फोट तथा हत्याए कि हैं । अगर घटनाओं कि सूची बनाई जाए एक लम्बी सूची तयार हो जाएगी । लेकिन सरकारी जांच एजेन्सी कितनी घटनाओं मे अपराधीयों तक पहुच पायी या कमसे कम विधिवत जांच प्रक्रिया को आगे बढा पाई । यह एक जिज्ञासा का बिषय है।
जिस प्रकार मालेगाव बिष्फोट के मामले में ए.टी.एस. साक्ष्यों को जुटाने का संकेत दे रही है उसे देख कर लगता है की वह र्सवज्ञ है । मिडिया से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह सन्देह होता है की एक सोचे समझे षडयन्त्र के तहत हिन्दु कार्यकर्ता एवमं संगठनों को फंसाया जा रहा है । कोई नक्सली बम से थाने को उडा देता है, रेले स्टेशन को उडा देता है तो सरकार की एजेंसीया कोई सबुत नही जुटाती है, कोई कारवाही नही करती है। जेहादी जब तब हिन्दुओ को निशाना बनाते है तो सरकार उन्हे न रोक पाती है । लेकिन साध्वी प्रज्ञा के मामले जांच प्रकृया ऐसे चल रही है जैसे एटीएस विश्व की सबसे कार्यकुशल एजेंसी है। धीरे धीरे एक एक जानकारी मिडीया को ऐसे लीक की जा रही है जैसे कोई जासुसी सिनेमा बनाया जा रहा हो। दिगविजय सिंह, आर.आर.पाटिल और विलासराव देशमुख ऐसे ईशारो मे बात करते वे हमलोग के अशोक कुमार हो।
अनेक प्रश्न ऐसे है जिनके उतर भविष्य के गर्भ में छुपे है। कोई भी योजनाकार अपनी मोटरसाईकिल का प्रयोग धमाके मे नही करेगा। जिस प्रकार की फोन ट्रांस्क्रीप्ट दी गई है वह सुनियोजित षडयंत्र (स्टींग अपरेशन) की तरह लगती है। ऐसा लगता है की किसी आस्थावान हिन्दु के निर्दोष वार्तालाप का प्रयोग उसे फंसाने के लिए किया जा रहा है। मुझे यह संदेह है की किसी विधर्मी विदेशी एजेंसी ने कुछ आस्थावान हिन्दुओ के बीच घुस कर बम विस्फोट किया और फिर उनके खिलाफ साक्ष्य जुटा कर शांतीप्रिय हिन्दु समाज को आतंकवादी सिद्ध करने की कवायद शुरु कर दी।
सिर्फ आतंकवाद ही हिन्दु मुक्ति का मार्ग नही है। और मै तो मुसल्मान भाईयो को अपना दुश्मन भी नही मानता। किंतु हम सब को अपने अपने ढंग से राष्ट्र रक्षा अभियान मे जुटना होगा। मै न तो संघ, ना भाजपा और ना ही विहीप का कार्यकर्ता हुं। हिन्दुओ को आत्मबल बनाए रखना होगा। मनोबल मे कोई ह्रास न आने पाए। ईतिहास के एक महत्वपुर्ण दोराहे पर हम खडे है। हमारा आज का निर्णय हमारे भविष्य के अस्तित्व से जुडा हुआ है। आज चुप रहने और हाथ पर हाथ धरे बैठने का अर्थ है मौत। उठो जागो ..........
कुछ दिनो से ब्लग के माध्यम से मै आप सब के बीच था। मै हिन्दी की औचारिक शिक्षा प्राप्त नही कर पाया था। लेकिन चिट्ठे पढते लिखते आप सभी की कृपा से कुछ आत्म विश्वास हासिल कर पाया इसके लिए मै सभी का आभारी हुं। लेकिन मेरी आत्मिक संवेदनशीलता और अपने पेशे की जरुरतो के कारण मेरे इस अंतिम चिट्ठे के साथ मै आपके बीच से बिदा होता हुं। कभी कही भुल चुक हुई हो या किसी का दिल दुखाया हो तो माफ करेगे। हरि ओम तत सत !!!
इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही। पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही। अंबर में सिर, पाताल चरण है । मन इसका गंगा का बचपन है। इस हिमालय की गोद मे बसा देश नेपाल । भारत और नेपाल के लोगो के बीच विशेष प्रकार के सम्बन्ध है । सरकारेँ या मिडिया इस विशेष प्रकार के रिश्ते को समझ पाने मे असमर्थ रही है । यह एक कोशिश है नेपाल की वास्तविकताओ को आप तक पहुँचाने की . . . . . . .
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Saturday, November 8, 2008
Wednesday, September 17, 2008
नेपाल भारत सिमा पर शंकराचार्य द्वार

कांची कामकोटी पीठ के शंकराचार्य के नेपाल प्रवेश के अवसर पर नेपाल-भारत सिमा पर निर्मित शंकराचार्य द्वार को नेपाल का प्रवेश-द्वार माना जाता है। कलात्मक ढंग से निर्मित इस प्रवेश-द्वार को नेपाल प्रवेश करते समय देखने पर मन श्रद्धा से भर जाता है। यह प्रवेश-द्वार नेपाल एवम भारत के सांस्कृतिक एवं धार्मिक सम्बन्धो का प्रतिक है। बर्तमान भारत सरकार, नेपाल एवम भारत के सम्बन्धो में धार्मिक महत्व की अनदेखी करता रही है। नेपाल मे अवस्थित अनेकानेक धार्मिक स्थानो का हिन्दु एवम बौद्ध परम्पराओं मे विशेष महत्व है।
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