Saturday, November 8, 2008

साध्वी का सच और हिन्दु संगठनो की हकिकत

सोनिया के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार और उसकी गुलाम मिडीया हिन्दु संगठनो पर आतंकवादी का बिल्ला चिपकाना के लिए हर संभव प्रयत्न कर रही है। लेकिन आईए वास्तविकता को समझने का प्रयास करें।

भारत में पिछले दश बर्षो में नक्सलियो ने हजारो बम बिष्फोट किए हैं, माओवादीयों ने हजारों को मौत के घाट उतारा हैं । वैसे ही जेहादियों ने भी उतनी ही तादाद में बिष्फोट तथा हत्याए कि हैं । अगर घटनाओं कि सूची बनाई जाए एक लम्बी सूची तयार हो जाएगी । लेकिन सरकारी जांच एजेन्सी कितनी घटनाओं मे अपराधीयों तक पहुच पायी या कमसे कम विधिवत जांच प्रक्रिया को आगे बढा पाई । यह एक जिज्ञासा का बिषय है।

जिस प्रकार मालेगाव बिष्फोट के मामले में ए.टी.एस. साक्ष्यों को जुटाने का संकेत दे रही है उसे देख कर लगता है की वह र्सवज्ञ है । मिडिया से प्राप्त जानकारी के आधार पर यह सन्देह होता है की एक सोचे समझे षडयन्त्र के तहत हिन्दु कार्यकर्ता एवमं संगठनों को फंसाया जा रहा है । कोई नक्सली बम से थाने को उडा देता है, रेले स्टेशन को उडा देता है तो सरकार की एजेंसीया कोई सबुत नही जुटाती है, कोई कारवाही नही करती है। जेहादी जब तब हिन्दुओ को निशाना बनाते है तो सरकार उन्हे न रोक पाती है । लेकिन साध्वी प्रज्ञा के मामले जांच प्रकृया ऐसे चल रही है जैसे एटीएस विश्व की सबसे कार्यकुशल एजेंसी है। धीरे धीरे एक एक जानकारी मिडीया को ऐसे लीक की जा रही है जैसे कोई जासुसी सिनेमा बनाया जा रहा हो। दिगविजय सिंह, आर.आर.पाटिल और विलासराव देशमुख ऐसे ईशारो मे बात करते वे हमलोग के अशोक कुमार हो।

अनेक प्रश्न ऐसे है जिनके उतर भविष्य के गर्भ में छुपे है। कोई भी योजनाकार अपनी मोटरसाईकिल का प्रयोग धमाके मे नही करेगा। जिस प्रकार की फोन ट्रांस्क्रीप्ट दी गई है वह सुनियोजित षडयंत्र (स्टींग अपरेशन) की तरह लगती है। ऐसा लगता है की किसी आस्थावान हिन्दु के निर्दोष वार्तालाप का प्रयोग उसे फंसाने के लिए किया जा रहा है। मुझे यह संदेह है की किसी विधर्मी विदेशी एजेंसी ने कुछ आस्थावान हिन्दुओ के बीच घुस कर बम विस्फोट किया और फिर उनके खिलाफ साक्ष्य जुटा कर शांतीप्रिय हिन्दु समाज को आतंकवादी सिद्ध करने की कवायद शुरु कर दी।

सिर्फ आतंकवाद ही हिन्दु मुक्ति का मार्ग नही है। और मै तो मुसल्मान भाईयो को अपना दुश्मन भी नही मानता। किंतु हम सब को अपने अपने ढंग से राष्ट्र रक्षा अभियान मे जुटना होगा। मै न तो संघ, ना भाजपा और ना ही विहीप का कार्यकर्ता हुं। हिन्दुओ को आत्मबल बनाए रखना होगा। मनोबल मे कोई ह्रास न आने पाए। ईतिहास के एक महत्वपुर्ण दोराहे पर हम खडे है। हमारा आज का निर्णय हमारे भविष्य के अस्तित्व से जुडा हुआ है। आज चुप रहने और हाथ पर हाथ धरे बैठने का अर्थ है मौत। उठो जागो ..........

कुछ दिनो से ब्लग के माध्यम से मै आप सब के बीच था। मै हिन्दी की औचारिक शिक्षा प्राप्त नही कर पाया था। लेकिन चिट्ठे पढते लिखते आप सभी की कृपा से कुछ आत्म विश्वास हासिल कर पाया इसके लिए मै सभी का आभारी हुं। लेकिन मेरी आत्मिक संवेदनशीलता और अपने पेशे की जरुरतो के कारण मेरे इस अंतिम चिट्ठे के साथ मै आपके बीच से बिदा होता हुं। कभी कही भुल चुक हुई हो या किसी का दिल दुखाया हो तो माफ करेगे। हरि ओम तत सत !!!

8 comments:

ab inconvenienti said...

आपकी इस पोस्ट से कांग्रेस समर्थकों और देशद्रोही सेक्यूलरिस्टों का दिल ज़रूर दुखेगा, पर उनसे माफ़ी मांगने की क्या ज़रूरत?

Suresh Chiplunkar said...

सेकुलरिज़्म का सबसे बड़ा उदाहरण यही है कि कश्मीरी हिन्दू अपने ही देश में शरणार्थी हैं और कांग्रेस खुद पीडीपी जैसे आतंकवादी दलों के साथ सत्ता का सुख भोग रही है… इतने गिरे हुए हैं सेकुलर लोग कि कहा नहीं जा सकता…

संजय बेंगाणी said...

चिट्ठा लिखना बन्द करने की क्या जरूरत है. मन करे तब लिखें.

Suresh Chandra Gupta said...

कांग्रेस ने कभी हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए काम नहीं किया. उस की नीति ही यह है कि इन दोनों समुदायों को आपस में लड़ाते रहो और मौज उड़ाते रहो. आज कल कुछ शिक्षित मुसलमान भी इस मुहिम में शामिल हो गए हैं. उर्दू के कुछ अखबार, और कुछ मुस्लिम ब्लागकार लगातार विषवमन कर रहे हैं. सरकार और मीडिया की और से इन्हें पूरा समर्थन मिल रहा है. अब दिल्ली और गुवाहाटी बम धमाकों के बारे में कोई ख़बर नहीं आती. बेंगलोर, अहमदाबाद, जयपुर और अन्य शहरों में हुए धमाके तो ऐसा लगता है जैसे हुए ही नहीं थे. बस सारा जोर मालेगांव पर है. हिन्दुओं की पूरी कौम को आतंकवादी साबित करने की रात-दिन कोशिश हो रही है. वह लोग जो मुस्लिम आतंकवाद कहने पर तिलमिलाते थे, अब हिंदू आतंकवाद कह कर एक अंदरूनी खुशी हासिल कर रहे हैं. एक ब्लाग्कारा तो पूरी फौज को आतंकवादी कह रही हैं. चुनाव आ रहे हैं. कांग्रेस और उनके यह हमनवां हर कोशिश कर रहे हैं और करेंगे कि इस देश में हिंदू-मुस्लिम दंगे हो जाएँ.

हिंदू धर्म अहिंसा का धर्म है. सच्चाई क्या है यह समय बताएगा, पर कुछ हिन्दुओं के ग़लत रास्ते पर चले जाने से इन अमन के दुश्मनों को एक मौका मिल गया है, देश में नफरत फैलाने का. हिन्दुओं को बहुत सावधान रहना चाहिए. यह हमारा देश है. हमें यह पूरी कोशिश करनी है कि किसी तरह भी इन लोगों के इरादे कामयाब न हो पायें, अमन-चैन खतरे में न पड़ने पाये. कुछ लोग इस मुल्क के प्रति कोई बफादारी महसूस नहीं करते. ऐसे लोग यही चाहेंगे कि यहाँ अंगे हों, जिस से देश कमजोर हो.

Suresh Chandra Gupta said...

लिखते रहिये. लिखना बंद मत कीजिए. यह समय की जरूरत है.

Ratan Singh Shekhawat said...

सुरेश चंद्र जी ने जो कमेन्ट किए है में उनसे सहमत हूँ |
और चिटठा लिखना बंद न करे कभी कभी जरुर लिखते रहे |

रौशन said...

अपनी बात कहने का हक़ सभी को है लिखिए और दूसरों को पढिये
बस ये वर्ड वेरिफिकेशन हटा दीजिये

SANJAY SINGH said...

Aap achhe vicharak hain. chittha likhne se vidaiiiiiii? No.
apke ek comment par prapt comments ki link de rahe hain. kripa kar vichaar avashya den. http://rudrasandesh.blogspot.com/2008/11/blog-post_08.html?showComment=1226770380000#comment-c3694658012404859381