Friday, September 5, 2008

साउदी अरेबिया और मलेसिया मे नेपालियो की मौतें

विगत 15 वर्षो से नेपाल मे चल रहे माओवादी विद्रोह ने देश को तोड कर रख दिया है। अतिवादी ट्रेड-युनियनवाद और दंडहिनता के कारण नए रोजगारी की सृजना यहां बिल्कुल ठप्प पड गई है। परम्परागत रुप से यहां के लोग भारत जा कर सेना, उद्योग या फिर चौकिदारी का हीं काम कर लिया करते थे। लेकिन खाडी के देशों, मलेशिया और कोरिया मे कामदारो की बढती मांग ने नेपालियो को भी आकर्षित किया है ।

बडी संख्या मे नेपाल से लोग खाडी के देशो, मलेसिया और कोरिया जा रहे है रोजगारी के लिए । लेकिन 55 डिग्री तापक्रम मे खराब खानपान और जैविक आवश्यकताओं से वंचित रहना उन्हे कमजोर बना देता है । हरेक महिने करिब 50/55 नेपाली काम के दौरान साउदी अरेबिया और मलेशिया मे स्वर्ग सिधार रहे है । वहां से आने वाले प्लेनों मे जिन्दे लोग के साथ रोज 1-2 शव भी आ रहे हैं ।

नेपाल के विदेश मंत्रालय के तथ्यांको से पता चलता है की पचास प्रतिशत मौतें तो साउदी अरेबिया जाने युवाओ की हो रही है। मलेसिया दुसरे नम्बर पर है। ईतना हीं नही मृतको को दिए जाने वाले क्षतिपुर्ति मे भी भारी भेद-भाव है। अगर मृतक मुसलमान है तो अधिक क्षतिपुर्ति प्राप्त होती है और हिन्दु है तो नगण्य मात्रा मे क्षतिपुर्ति मिलती है ।

3 comments:

कुमुद अधिकारी said...

प्रिय भाई,
आपका चिट्ठा(ब्लॉग) देखने-पढ़ने का सुअवसर मिला। नेपाल और भारत के बीच जो सांस्कृतिक संबंध हैं उन्हें हर हालत में बचाए रखने की जरूरत है। राजनीति से बहुत परे जो आत्मीय संबंध है, नेपाली और भारतियों के बीच वो ही दरअसल प्रेम और भाइचारे का संबंध है।
आपका चिट्ठा इस मायने में सफल हो, इन्ही शुभकामनाओं के साथ,
कुमुद,
इटहरी, नेपाल।

संगीता पुरी said...

आपके चिट्ठे पर पहली बार आयी। आपके चिट्ठे के माध्यम से हमारा पारस्परिक संबंध मजबूत होगा , यही आशा रखती हूं।

Arvind Mishra said...

माओवाद और इस्लाम जनित आतंकवाद विश्व शान्ति को ग्रसने वाले राहू केतु हैं !